पटना की नीट छात्रा बलात्कार एवं हत्या मामले की गत 2 मार्च के सुनवाई के बाद से ही पीड़िता पक्ष को यह अंदेशा होने लगा था कि अगली तारीख को यानी की 11 मार्च को इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिल जाएगी और इस केश में पीड़िता के परिजनों को न्याय मिलना मुश्किल होगा।
क्योंकि उस दौरान इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के कोर्ट में उपस्थित अधिवक्ता का पूरा प्रयास था की कैसे भी करके कोर्ट मनीष रंजन को जमानत पर रिहा कर दे। उनकी तरफ से कोर्ट में लिखित रूप से यह दे दिया गया था की इस मामले में मनीष रंजन पूरी तरह से निर्दोष है। उसे जमानत पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
पोक्सो कोर्ट में गत 2 मार्च को पीडिता पक्ष के समर्थन में अनेको अधिवक्ता भी उपस्थित थे। उन्हीं में से एक अधिवक्ता के अनुसार गत दो मार्च को सीबीआई के अधिवक्ता का तेवर बेहद उग्र था। वे आरोपी मनीष रंजन को जमानत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे।
किसी संदर्भ में सीबीआई के अधिवक्ता की झड़प पीड़िता पक्ष के वकील के साथ न्यायाधीश से भी हो गई थी। उस दौरान पोक्सो कोर्ट में उपस्थित उस अधिवक्ता के अनुसार पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता ने तो अपने जान का डर होने का लिखित आवेदन भी इसी कोर्ट में माननीय न्यायाधीश को दिया था।
और माननीय न्यायाधीश ने अपने सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित डीसीपी अनु कुमारी को यह पत्र देते हुए इस पर संज्ञान लेने का भी आदेश दिया था। इसके बाद पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता को पुलिस सुरक्षा मिली है या नहीं इस पर कोई सूचना अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
इन्हीं सब परिस्थितियों में 2 मार्च की सुनवाई के बाद पीड़िता पक्ष के समर्थकों में सीबीआई के रवैया से यह अंदेशा होने लगा था कि अगले तारीख पर सीबीआई आरोपी मनीष रंजन की जमानत करवा के ही दम लेगी।
लेकिन गत 5 मार्च को ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्री पद को छोड़कर राज्यसभा का चुनाव लड़ने के ऐलान किया। इसके बाद इस केस में अचानक सकारात्मक परिणाम की सूचना मीडिया से ही मिलने लगी है।
बिहार से निकलने वाले अनेक प्रमुख दैनिकों में पिछले दो दिन के खबरों में मनीष रंजन पर सीबीआई ने पोक्सो एक्ट लगाए, पीड़िता के परिजनों का कोर्ट में लिया जाएगा बयान, संदिग्ध अस्पताल संचालकों से सीबीआई करेगी पूछताछ प्रमुखता से दिख रही है। यह इस केस के सकारात्मक पहलू माना जा सकता हैं।
