पटना | 26 फरवरी, 2026पटना की एक NEET छात्रा के साथ हुई हृदयविदारक घटना के मामले में आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कोर्ट रूम का माहौल उस समय भावुक और तनावपूर्ण हो गया जब माननीय न्यायाधीश ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की सुस्ती पर तीखा प्रहार किया और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने ही एक पुराने आदेश पर खेद जताया।
CBI की कार्यशैली पर ‘हथौड़े’ जैसी चोट:
सुनवाई शुरू होते ही अदालत ने CBI से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी। मामला सौंपे जाने के 15 दिन बीत जाने के बाद भी किसी ठोस नतीजे पर न पहुँचने पर जज साहब ने सख्त नाराजगी जाहिर की।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:”15 दिन बीत गए और आप अब तक शुरुआती जांच भी पूरी नहीं कर पाए हैं? अगर जांच की यही रफ्तार रही, तो क्यों न आप (CBI) पर ही केस चला दिया जाए?”
यह टिप्पणी जांच एजेंसी के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि अदालत अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
न्यायपालिका का मानवीय चेहरा: कोर्ट का ‘माफीनामा’आज की सुनवाई की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक बात यह रही कि कोर्ट ने अपने पूर्व के एक आदेश पर सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया। पूर्व में पीड़ित परिवार का DNA टेस्ट कराने का आदेश दिया गया था, जिसे कोर्ट ने आज वापस लेते हुए कहा कि परिवार पहले से ही असहनीय मानसिक पीड़ा में है।
अदालत ने स्वीकार किया कि जांच का मुख्य केंद्र आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाना होना चाहिए, न कि पीड़ित परिवार को जांच की प्रक्रियाओं में उलझाकर और परेशान करना।
“बेटी, रोना नहीं… न्याय हम दिलाएंगे”
कोर्ट रूम में उस समय सन्नाटा पसर गया जब पीड़िता की माँ अपने आंसू नहीं रोक पाईं। उन्हें ढांढस बंधाते हुए जज साहब ने अत्यंत संवेदनशील लहजे में कहा, “आपको रोना नहीं है, हम आपको न्याय दिलाएंगे।”
न्यायपालिका का यह आश्वासन न केवल परिवार के लिए, बल्कि न्याय की उम्मीद लगाए हर नागरिक के लिए संबल बनकर उभरा है।
बेल के खिलाफ वकील SK पांडेय की जोरदार घेराबंदी:
हॉस्टल मालिक और मुख्य संदिग्धों में शामिल मनीष रंजन की जमानत अर्जी का प्रखर विरोध किया गया। प्रख्यात अधिवक्ता SK पांडेय और उनकी टीम ने कोर्ट में दलीलों का अंबार लगा दिया। उन्होंने साक्ष्यों के साथ यह साबित करने की कोशिश की कि:आरोपी की बाहर मौजूदगी साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का कारण बन सकती है।
घटना में आरोपी की भूमिका संदिग्ध है और उसे बेल देना जांच को पटरी से उतारने जैसा होगा।
28 फरवरी पर टिकी निगाहें
सामाजिक संगठन और अधिवक्ता समाज (जिसमें भूमिहार बैठकी के सदस्य भी सक्रिय हैं) इस न्यायिक लड़ाई को मजबूती से लड़ रहे हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 28 फरवरी को तय की है।
आज की सुनवाई ने यह साफ कर दिया है कि भले ही जांच एजेंसियां सुस्त हों, लेकिन कानून की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठे लोग न्याय के प्रति सजग हैं। अब सबकी नजरें 28 फरवरी पर हैं, जब CBI को अपनी कार्रवाई का जवाब देना होगा।
