Tuesday, March 10, 2026
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पटना नीट छात्रा मामला: क्या इस मामला में अनदेखी, नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री की कुर्सी को ग्रहण लगा गया?

राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकार के दायरे में सीबीआई जैसी जांच एजेंसी का कंट्रोल भले नहीं रहता हो। लेकिन केंद्र में उनके समर्थन से भाजपा सरकार चल रही हैं। ऐसे में सीबीआई को आवश्यक दिशा निर्देश मुख्यमंत्री या फिर उनके अधिनस्थओ द्वारा देना कोई आश्चर्य जैसी बात नहीं है।

लेकिन पटना नीट छात्रा मामला की सीबीआई को जांच सौंपने का ढिंढोरा पीट कर फिर सीबीआई के हाथ बांध देना। उसके जांच का दायरा सीमित कर देना। उन्हें सख्त निर्देश दे देना आरोपीयों से दूर रहो। यह क्या दर्शाता हैं।

और सबसे शर्मनाक सीबीआई का भी पहले दिन से पीड़िता पक्ष के परिजनों की निरंतर जांच, और फिर उसका पीड़िता के परिवार वालों को शर्मसार करने वाला मीडिया ट्रायल।

ऐसे में पीड़िता के परिवार ही नहीं पटना और बिहार के साथ पूरे देश में इस मामले से भावनात्मक ढंग से जुड़े लोगों में बेचैनी थी। और भले ही वे सीधे इसका विरोध नहीं कर पा रहे थे लेकिन पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने के लिए अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है।

अनेक संगठन इसका सड़कों पर विरोध कर रहे हैं तो हजारों सोशल मीडिया योद्धा निडर होकर अपना मोर्चा संभाले है। सबसे बड़ी बात तो इस मामले में पीड़िता पक्ष को निःशुल्क कानूनी मदद है।

इस मामले से भावनात्मक ढंग से जुड़े अनेकों प्रसिद्ध अधिवक्ता केस की तारीखों पर कोर्ट रुम में खड़े रहते हैं। पूरी सुनवाई सुनते हैं। और आवश्यकता पड़ने पर पीड़िता पक्ष के धाकड़ वकील एस के पांडे की मदद भी करते हैं।

जबकि इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए केंद्र से बुलाई गई जांच एजेंसी सीबीआई कि कोर्ट में 2 मार्च तक की सफलता शून्य थी। मामले की जांच जहां तक स्थानीय पुलिस और SIT टीम ने की थी। सीबीआई उसमें कोई नया अध्याय जोड़ने में सफल नहीं होने की बात कोर्ट में जमा किए गए अपने रिपोर्ट में दी थी।

अब अचानक ही परिदृश्य बदल गया है मतलब बिहार में पिछले 20 वर्षों से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार गत 6 मार्च को अचानक ही अपने मुख्यमंत्री की कुर्सी को त्याग कर राज्यसभा की सदस्यता के लिए आवेदन दे दिया है और अगले एक हफ्ते में बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री के ताजपोशी की तैयारी हो रही है।

और इसे संयोग नहीं कहा जा सकता की इसी तारीख यानी 6 मार्च से ही सीबीआई सूत्रों के हवाले से पटना नीट छात्रा मामले में सकारात्मक समाचार आने लगे है। जहां सीबीआई इस मामले की पिछली तारीख यानी की 2 मार्च को इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन को जमानत देने की तरफदारी कर रही थी। वही अब सीबीआई सूत्रों से विभिन्न समाचार पत्रों में मनीष रंजन का पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी, पीड़िता पक्ष के परिजनों की कोर्ट में बयान दर्ज करवाने और इस मामले में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले अस्पताल प्रबंधकों से भी पूछताछ की तैयारी दिखाई है।

इन सब बातों की पुष्टि कल यानी 11 मार्च को कोर्ट में हो सकता है। कल कोर्ट में सीबीआई मनीष रंजन के रिमांड की भी मांग कर सकता है इसके साथ संबंधित संदिग्ध अस्पताल प्रबंधन से इस दौरान की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा दे सकता है।

वरिय सूत्र के अनुसार इस मामले में स्थानीय प्रशासन के कुछ लोग लगातार सीबीआई के जांच अधिकारियों को दिशा निर्देश दे रहे थे। लेकिन पीडित पक्ष के लोग भी पटना से लेकर दिल्ली तक पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे।

इस मामले में सीबीआई द्वारा निरंतर एक तरफ़ा जांच और फिर कोर्ट में भी एकमात्र गिरफ्तार आरोपी को लिखित रूप से निरपराध बताते हुए जमानत देने की सिफारिश करने की बात पूरे देश भर की मीडिया और सोशल मीडिया ने जोर-जोर से उठाया था। जिससे राज्य के साथ केंद्र की भाजपा सरकार की किरकिरी हो रही थी।

और इसी पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने और खासकर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने सीबीआई अधिकारियों से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई है और फिर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। इसी के सकारात्मक परिणाम आज दिख रहे है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का एकमात्र कारण भले ही सिर्फ नीट छात्रा मामला न हो। क्योंकि विभिन्न राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राज्य को सिर्फ तीन चार नौकरशाह चला रहे थे। ना इसमें जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुनी जा रही थी ना सहयोगी दलों के नेताओं और मंत्रियों की।

राज्य में निरंकुश भ्रष्टाचार, अपराध, अव्यवस्था जैसे अनेक कारण थे जिससे राज्य के राजनीति से जुड़े हर व्यक्ति यह कह रहा था कि यहां बदलाव आवश्यक है। और कुछ चापलूस अफसर शाह के बहकावे में राज्य सरकार द्वारा नीट छात्रा मामले में अनदेखी ने इस मामले में आग में घी का काम किया है।

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