खगड़िया। भारतीय रेलवे में ‘जंक्शन’ का दर्जा रखने वाला और राजस्व के मामले में सोनपुर मंडल को मालामाल करने वाला खगड़िया जंक्शन आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। ताज्जुब की बात है कि जिस स्टेशन से छह दिशाओं के लिए रेल लाइनें फूटती हैं, वहां से किशनगंज-अजमेर गरीब नवाज एक्सप्रेस (15715/15716) पिछले 25 वर्षों से बिना रुके सर्राटे भरते हुए निकल जाती है।
दूरी का गणित या विकास के नाम पर छलावा?
आंकड़े गवाही देते हैं कि नवगछिया और बेगूसराय के बीच की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है। रेलवे के नियम और व्यवहारिकता कहती है कि इतने लंबे अंतराल के बीच एक प्रमुख जंक्शन पर ठहराव अनिवार्य होना चाहिए। लेकिन विडंबना देखिए:
हाजीपुर और सोनपुर के बीच की दूरी मात्र 5 किमी है, वहां दोनों जगह ठहराव है।
बेगूसराय और बरौनी के बीच मात्र 15 किमी की दूरी पर दो स्टॉपेज हैं।
कटिहार जिले में अकेले इस ट्रेन के 4 ठहराव (बारसोई, आजमनगर, लाभा और कटिहार) हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खगड़िया की लाखों की आबादी रेल मंत्रालय की फाइलों में ‘अदृश्य’ है?
राजस्व में ‘किंग’, सुविधाओं में ‘कंगाल’
खगड़िया जंक्शन राजस्व देने के मामले में सोनपुर मंडल में तीसरे स्थान पर है और यात्रियों की आवाजाही (Footfall) के मामले में हाजीपुर के बाद दूसरे पायदान पर काबिज है। मुंगेर, सहरसा, समस्तीपुर और बेगूसराय जैसे जिलों को जोड़ने वाला यह केंद्र बिंदु होने के बावजूद यहाँ के यात्रियों को अजमेर या दिल्ली जाने के लिए या तो 60 किमी दूर नवगछिया जाना पड़ता है या फिर बेगूसराय की दौड़ लगानी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के ‘दिग्गज’ कहलाने वाले राजनेता और नुमाइंदे पिछले ढाई दशकों में एक अदद ठहराव सुनिश्चित नहीं करा पाए। 2024 में पड़ोसी सांसद के प्रयास से मानसी में राजधानी का ठहराव तो मिला, लेकिन खगड़िया मुख्य जंक्शन आज भी एक साधारण एक्सप्रेस ट्रेन के लिए तरस रहा है।
”यह केवल एक ट्रेन के ठहराव का मुद्दा नहीं है, यह खगड़िया के स्वाभिमान और उसके हक की लड़ाई है। जब कम दूरी वाले स्टेशनों पर मेहरबानी बरसी जा रही है, तो खगड़िया के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?”
ये बाते खगड़िया स्टेशन से यात्रा करने वाले हर यात्री के मन में निरन्तर उठता रहता है।
गरीब नवाज एक्सप्रेस किशनगंज से खुलकर जयपुर, अजमेर, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों को जोड़ती है। खगड़िया में इसके ठहराव से न केवल व्यापारियों और छात्रों को लाभ होगा, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी। अब देखना यह है कि रेल मंत्रालय अपनी ‘कुंठा’ त्यागकर इस जंक्शन को उसका जायज हक कब देता है।
