बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं जिससे बिहार ही नहीं देश भर के लोगों को अचंभित कर देने वाला फैसला माना जा सकता हैं। कल यानी 4 मार्च की शाम तक हर तरफ राजनीतिक हल्को में यह चर्चा थी की नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार राज्यसभा मैं जाएंगे।
लेकिन कहीं भी यह चर्चा नहीं थी की नीतीश कुमार बिहार में पिछले 20 साल से मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद अचानक ही राज्यसभा की सीट के लिए दावेदारी करते हुए बिहार के अपने मुख्यमंत्री पद को छोड़ देंगे।
आज यानी कि गुरुवार को सुबह होते-होते यह मामला साफ हो गया और यह भी बात सामने आए कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नीतीश कुमार के साथ भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपना राज्यसभा के लिए आवेदन देंगे। इन दोनों के साथ एनडीए गठबंधन के अन्य दो प्रत्याशी और फिर विपक्ष के तरफ से एक प्रत्याशी नामांकन भरेंगे।
और सब बातें तो सब साधारण थी लेकिन नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री के पद से हटकर राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी आवेदन भरने की बात लगभग हर जनता दल यूनाइटेड के नेता विधायक सांसद के साथ आम कार्यकर्ताओं को भी नहीं पच पाया और आज सुबह से ही जदयू कार्यकर्ताओ का हुजूम नीतीश कुमार के इस फैसले का विरोध करते हुए उनके आवास के बाहर खड़ी दिखी। उग्र कार्यकर्ताओं द्वारा पटना के जदयू कार्यालय में भी तोड़फोड़ किए जाने की सूचना है
इन कार्यकर्ताओ में रोष इतना था कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री आवास पर उपस्थित जदयू नेता संजय झा, ललन सिंह और अशोक चौधरी के विरोध में भी जमकर नारेबाजी कर रहे थे। वही भाजपा के विरोध में भी जोरदार नारेबाजी हो रही थी। जबकि अनेक कार्यकर्ता मीडिया के सामने फूट-फूट कर रोतेभी दिखे। स्थानीय पुलिस के वरिष्ठतम अधिकारियों ने संयुक्त ढंग से इन उग्र कार्यकर्ताओं को शांत करने का प्रयास किया।
सबसे ज्यादा हताशा तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नजदीकी विधायकों में दिखी। उनकी मीडिया से बातचीत के दौरान यह शिकायत रही की कितना भी प्रयास करने के बावजूद कल शाम से ही ना नीतीश कुमार से कोई बात हो पा रही है। ना उनके आवास पर प्रवेश दिया जा रहा है।
जिससे आजभी मुख्य मंत्री से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई और तब तक खुद नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पुराना ट्विटर) और फेसबुक पर यह बयान जारी कर दिया की वे स्वेक्षा से राज्यसभा में जाना चाहते हैं। क्योंकि वे विधानसभा, विधान परिषद के साथ लोकसभा का चुनाव भी जीत चुके हैं। अब उनकी इच्छा राज्यसभा में जाने की है।
ऐसे में जदयू के नेताओं को एक दिन भी नहीं महज कुछ घंटे में जो वे शान से बिहार में उनके पार्टी के मुख्यमंत्री होने की बात सीना ठोक कर कहते थे। अब वे अपने आप को बेसहारा जैसा महसूस कर रहे हैं।
