Monday, March 23, 2026
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फतुहा में गंगा कब तक मैली होते रहेगी, पुनपुन नदी इतनी जहरीली कैसे हो गई??

राजेश सिन्हा

एक समय था जब फतुहा में आकर गंगा में समाहित होने वाली नदी पुनपुन के कीछाड़े पर बसे दर्जनों गांव वासी इस नदी का पानी घर के रसोई के उपयोग में लाते थे। मतलब 30-35 वर्ष पहले। लोगो का नहाना, जानवर धोना, खेतों की सिंचाई का एकमात्र श्रोत पुनपुन नदी का पानी था। तब गांव में चापा कल और कुएं गिने चुने हुआ करते थे।

लेकिन अब समय बिलकुल बदल गया है। पुनपुन नदी के किनारे बसे लोग अब नदी के आसपास जाने से भी कतराने लगे है। पीने का पानी लेजाने और नहाना तो दूर अब ये लोग अपने जानवरों को धोने भी नदी की किनारे नहीं जाते है। इसका एकमात्र कारण पुनपुन नदी का पानी पूरी तरह से दूषित और दुर्गन्धित हो जाना है।

हालांकि पटना नगर निगम क्षेत्र के नालों का दूषित पानी छोटी पहाड़ी स्थित जल शुध्दिकरण केंद्र मे शुद्धिकरण करके इस पुनपुन नदी में छोड़े जाने का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में यह बात भी रहस्य ही बना हुआ है कि ये पुनपुन नदी का पानी रसायनयुक्त हो कर जहरीला कैसे बन जाता है?

इसके जहरीलेपन का प्रमाण फतुहा के गोविंदपुर स्थित इस नदी के घाटों के निरीक्षण के बाद देखा जा सकता है। यहां वर्षों से नए पुल का निर्माण जारी है। इस पुल के निर्माण में कितना बजट, अब तक कितना खर्च, कितनी समय सीमा यह विषय बाद का है।

लेकिन यहां बहने वाले पानी में रंगीन झाग वाला पानी का नजारा कभी भी देखा जा सकता है। इस नदी के जहरीलेपन का प्रमाण नदी के घाटों के किनारे के घासो को देखकर समझा जा सकता है जो पूरी तरह से जलकर खत्म हो गए हैं।

इसके साथ इसके जहरीलेपन का प्रमाण इसी घाट पर लगे हुए जलकुंभियों के जले होने से समझा जा सकता है। सबसे नारकीय स्थिति तो इसी नदी पर बने हुए लोहे के वैकल्पिक पुल पर गुजरने के दौरान अनुभव की जा सकती है। जहां ज्यादातर लोग भयंकर दुर्गंध के कारण नाक पर गमछा रखकर इस पुल पर से गुजरते हैं।

इस घाट के दोनों तरफ सैकड़ो घर है और दिन रात नदी से निकलने वाले दुर्गंध का असर नदी के किनारे रह रहे सैकड़ों परिवार के लोगों के स्वस्थ पर नहीं पड़ता होगा यह कहना गैरवाजिब होगा।

इस  निर्माणाधीन पुल से महज 300 400 मीटर पूरब  ही यह पुनपुन का बदवूदार जहरीला पानी गंगा नदी के मुख्य धारा में जाकर मिल जाता है।

केंद्र सरकार गंगा शुद्धिकरण के नाम पर करोड़-अरबो रुपए खर्च करती है लेकिन इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर बार-बार आवाज उठने के बावजूद भी विभागीय चुप्पी बड़े भ्रष्टाचार और आपराधिक कृत्य का  इशारा कर रहे हैं।

पुनपुन नदी के जहरीले और दूषित होने का दर्द फतुहा के मूल निवासी और बिहार के जाने-माने पत्रकार अरुण कुमार पांडेय को भी है। उनके अनुसार पुनपुन नदी के दूषित और जहरीले होने के लिए लापरवाह और गैरजिम्मेदार शासन-प्रशासन और फतुहा नगर परिषद की उदासीनता हैरानी की बात है। नगर परिषद से इसको लेकर विशेष प्रस्ताव पारित कर नगर विकास विभाग को भेजने की अपेक्षा है।

वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय के अनुसार पुनपुन नदी के किनारे ही पूरे फतुहा शहर की आबादी बसी हुई है। सम्मसपुर, गोविंदपुर, बांकीपुर गोरख, पुरानी चौक, नोहटा, कल्याणपुर, दरियापुर, रायपुरा व मकसुदपुर तक के लोग गंगा नदी के दक्षिणी किनारे घाटों पर प्रदूषित पानी में नहाने को अभिशप्त हैं।

उन्होंने कहा कि गंगा नदी का पानी दूषित होने और जहरीले होने का प्रभाव वर्षों से रोज फतुहा की जनता झेल रही है। बावजूद इसके सरकार के तरफ गैर जिम्मेदाराना रवैया शर्मनाक है।

उनके अनुसार इस मुद्दे पर फतुहा वासियों में भारी रोष व्याप्त है और कभी भी पुनपुन नदी के शुद्धिकरण के पक्ष में बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो सकता है।

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