Thursday, March 5, 2026
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बिहार में ‘नीतीश युग’ का समापन: अब कौन होगा बिहार का नया ‘सुल्तान’?


​पटना | 05 मार्च 2026

​बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए राज्यसभा जाने के अपने फैसले की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उपस्थिति में और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ अपना राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है।

​नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स और फेसबुक पर यह स्पष्ट किया कि उनकी हमेशा से इच्छा थी कि वे बिहार विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—इन चारों सदनों के सदस्य बनें।

उनके अनुसार राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही उनका यह सपना अब पूरा होने जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही बिहार की सत्ता की कमान अब एक नए चेहरे के हाथ में जाना तय है।

​सत्ता के गलियारों में हलचल: कौन होगा अगला मुख्यमंत्री?
​नीतीश कुमार के इस कदम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?’

​सम्राट चौधरी (भाजपा): वर्तमान उपमुख्यमंत्री और पिछड़ा वर्ग (OBC) का बड़ा चेहरा होने के नाते इनका नाम सबसे आगे चल रहा है। पिछले वर्ष उपमुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्री बनाए जाने के बाद से ही उनके राज्य भर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रियता बढ़ी हुई दिख रही थी।

​विजय कुमार चौधरी (JDU): नीतीश कुमार के बेहद करीबी और अनुभवी नेता होने के कारण ये JDU की पहली पसंद हो सकते हैं। लेकिन यह बात दमदार नहीं लगती।

क्योंकि ये पूरा खेल भाजपा का है। और वर्षों से भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बिठाने के लिए संघर्षरत हैं। ऐसे में इस बार भाजपा के ही मुख्यमंत्री बनने की पूरी संभावना है।

​नित्यानंद राय (भाजपा): केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और बिहार के यादव समुदाय के कद्दावर नेता के रूप में इनके नाम की भी चर्चा तेज है। लेकिन संभावना न के बराबर।

क्योंकि भाजपा पिछले वर्ष के गुप्त चुनावी एजेंडे के तहत बिहार में यादव नेतृत्व को तहस नहस करने के एजेंडे पर काम किया है। और अब यादव मुख्यमंत्री की संभावना कम लग रही है।

​संघी मुख्यमंत्री की भी संभावना कम है। बिहार में संघ या संघ परिवार से राजनीति में आए विधायकों की संख्या उंगली पर गिनने जैसी है। उनमें से कोई बिहार जैसे बिगड़ी स्थिति को सुधारने का मद्दा रखने वाले नेता का नाम संघ परिवार में नहीं दिखता है। वैसे भाजपा केंद्रीय नेतृत्व हमेशा ही चौंकाने वाले निर्णय लेने के लिए मशहूर है।

लेकिन बिहार के मामले में भाजपा नेतृत्व नया रिस्क लेने के मूड में नहीं दिख रहा है। बिहार में नई सरकार के शुरुआत में भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी को जब उपमुख्यमंत्री के साथ राज्य के गृह मंत्रालय का भी भार सोपा गया था और शुरुआती के महीने में ही सम्राट चौधरी की प्रशासन पर धमक ने भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को यह विश्वास दिला दिया था की बंदे में दम है उसे सिर्फ मौका दिया जाना चाहिए।

हालांकि उस दौरान भी राज्य में प्रमुख सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने एक तरफा श्रेय लेने का आरोप सम्राट चौधरी पर लगाया था और फिर सम्राट चौधरी ने संयमित नेता की तरह अपनी भाषा बदल दी थी। फिर अपने हर भाषण में “राज्य के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में” यह लाइन जोड़ना शुरु कर दिया था।

अब मैदान पूरी तरह से भाजपा के लिए खाली है और राज्य के नए सुल्तान के लिए भाजपा किस चेहरे को आगे करती है यह समय ही बतायेगा।

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