Saturday, February 28, 2026
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बिहार में सहकारिता क्रांति: 2028 तक चालू होंगी रैयाम और सकरी चीनी मिलें, पैक्स बनेंगे ‘स्मार्ट’ सेवा केंद्र

पटना: बिहार में सहकारिता आंदोलन को नई धार देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार बड़े कदम उठा रही है। बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में सहकारिता विभाग की भविष्य की योजनाओं और वर्तमान प्रगति का खाका खींचा गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य की बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को वर्ष 2028 तक पुनः संचालित कर दिया जाएगा।

पैक्स का बदला स्वरूप: अब सिर्फ अनाज खरीद तक सीमित नहीं

​बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव श्री धर्मेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि पैक्स (PAXS) को अब बहुउद्देशीय केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये केंद्र अब निम्नलिखित सेवाएं देंगे:

  • जनऔषधि केंद्र और साझा सेवा केंद्र (CSC)।
  • खाद, बीज और कीटनाशक का वितरण।
  • किसान समृद्धि केंद्र और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानें।
  • ​ई-गवर्नेंस सेवाओं का सीधा लाभ।

सब्जी और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा: ‘वेजफेड’ का विस्तार

​सब्जी उत्पादकों के लिए ‘वेजफेड’ योजना के तहत सभी प्रखंडों में समितियां गठित की जा चुकी हैं।

  • आधारभूत संरचना: 114 समितियों में निर्माण कार्य जारी है और 200 आउटलेट बनाए जा रहे हैं।
  • भंडारण: 68 समितियों में प्याज भंडारण गोदाम और 4 कोल्ड स्टोरेज की स्वीकृति दी गई है।
  • मधुमक्खी पालन: पिछले 4 महीनों में समितियों की संख्या 144 से बढ़कर 224 हो गई है और राज्य स्तरीय फेडरेशन का गठन भी हो चुका है।

बैंकिंग और भंडारण क्षमता में वृद्धि

​किसानों को वित्तीय मदद पहुँचाने के लिए राज्य में 23 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की 290 शाखाएं कार्यरत हैं।

  • नए बैंक: सारण और दरभंगा में सहकारी बैंकों के लाइसेंस के लिए नाबार्ड को प्रस्ताव भेजा गया है, जबकि मधेपुरा और सहरसा में निबंधन की प्रक्रिया जारी है।
  • गोदाम: राज्य में अब तक 7,286 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 278 नए गोदामों के बनने से भंडारण क्षमता में 2.49 लाख मीट्रिक टन का इजाफा होगा।

विधान सभा अध्यक्ष के कड़े निर्देश

​माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने समितियों की सुस्त रफ्तार पर चिंता जताते हुए विभाग को विशेष निर्देश दिए:

  1. मार्केटिंग फेडरेशन के लिए राज्य स्तरीय ‘बाय-लॉज’ (Bye-Laws) बनाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करें।
  2. बुनकर, सब्जी और मधुमक्खी पालक समितियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागीय अभियान चलाएं।
  3. ​पैक्स के सुदृढ़ीकरण के लिए कृषि, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण तथा सहकारिता विभाग की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए।
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