Saturday, February 28, 2026
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बिहार सरकार का धर्मांतरण पर कोई कानून बनाने का विचार नहीं – मंत्री अरुण शंकर प्रसाद

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन धर्मांतरण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर ही मतभेद और जोरदार बहस देखने को मिली।

भाजपा के कई विधायकों द्वारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी सख्त ‘धर्मांतरण विरोधी कानून’ लाने की मांग को सरकार ने फिलहाल स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।

सरकार का रुख: “कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं”:

विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से उठाए गए इस सवाल का जवाब देते हुए सरकार की ओर से मंत्री अरुण शंकर प्रसाद (पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग) ने स्पष्ट किया कि राज्य में वर्तमान में ऐसा कोई कानून बनाने का विचार नहीं है।

उन्होंने सदन को सूचित किया कि:”बिहार सरकार के पास फिलहाल धर्म परिवर्तन को लेकर कोई नया कानून बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”

18 विधायकों ने उठाई मांग, सदन में हंगामा:

भाजपा के 18 विधायकों, जिनमें मैथिली ठाकुर से लेकर मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार मिश्रा, तारकेश्वर प्रसाद, बैद्यनाथ प्रसाद, नीतीश मिश्रा और अन्य शामिल थे, ने सामूहिक रूप से बिहार में बढ़ते धर्मांतरण पर चिंता जताई।

विधायकों का तर्क था कि:जनसंख्या में असंतुलन:

बिहार में ईसाइयों की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत (15.5%) के मुकाबले बिहार में यह दर 143.23% तक पहुंच गई है।

चर्चों की संख्या: राज्य में 5,000 से अधिक चर्च स्थापित हो चुके हैं।

सीमांचल का मुद्दा: विधायकों ने दावा किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों (सीमांचल) की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है।

प्रलोभन और धोखाधड़ी:

इन विधायकों ने सामूहिक रूप से आरोप लगाया गया कि मिशनरियों और अन्य धार्मिक समूहों द्वारा दलितों और युवतियों का प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है।

विधायकों के कड़े तेवर:

मिथिलेश तिवारी (भाजपा): “बक्सर में 1,000 दलित परिवारों का धर्मांतरण हो चुका है। जब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश ,गुजरात, उत्तराखंड जैसे अनेक राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून है, तो बिहार में क्यों नहीं?

“जीवेश कुमार (भाजपा): “संविधान में जाति बदलने की इजाजत नहीं है, तो धर्म कैसे बदला जा सकता है? धर्म बदलने के बाद भी लोग आरक्षण का लाभ कैसे ले रहे हैं?”

संजय सिंह (भाजपा):

उन्होंने धर्मांतरण को ‘राष्ट्रांतरण’ की संज्ञा देते हुए इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

विधानसभा अध्यक्ष का हस्तक्षेप:

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायकों ने जब सदन में हंगामा शुरू किया, तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने बीच-बचाव किया। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने इस मामले में नियमन दे दिया है और सरकार को इस पूरे विषय की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समीक्षा में आवश्यकता पाई गई, तो भविष्य में कानून पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल इस पर और चर्चा नहीं होगी।

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