पटना म्यूजियम में सजेगा सिनेमा का नया ठिकाना, 27 सितंबर को होगा ICCFF के संस्थापक संस्करण का आगाज
पटना, 25 सितंबर: बिहार में सिनेमा को देखने और समझने का नजरिया अब बदलने वाला है। राजधानी के पटना म्यूजियम में 27 सितंबर को इंडिया सिने कम्यून फिल्म फेस्टिवल (ICCFF) के संस्थापक संस्करण की शुरुआत होने जा रही है। यह सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल नहीं, बल्कि सिनेमा पर एक नए संवाद की पहल है।
फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत इसकी परिकल्पना है। इसे एक भ्रमणशील फेस्टिवल के तौर पर सोचा गया है, जिसका हर संस्करण भारत के एक अलग क्षेत्र की फिल्मों और वहां के फिल्मकारों को समर्पित होगा। और इसकी शुरुआत अपने बिहार से हो रही है। पहला संस्करण पूरी तरह बिहार केंद्रित है, जहाँ दर्शक सिर्फ पर्दे पर फिल्में नहीं देखेंगे, बल्कि उन्हें बनाने वाले लोगों से रूबरू होकर सवाल-जवाब भी कर सकेंगे।
दिन भर चलने वाले इस उत्सव में कुल सात फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। फेस्टिवल डायरेक्टर प्रियंका सिंह दर्शकों का स्वागत करेंगी और उद्घाटन फिल्म की निर्देशक शाजिया इकबाल के साथ बातचीत से कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
उद्घाटन फिल्म होगी ‘धड़क 2’
शाजिया इकबाल की बहुचर्चित फिल्म ‘धड़क 2’ फेस्टिवल की उद्घाटन फिल्म होगी। इसके बाद शॉर्ट फिल्मों का एक खास चयन दिखाया जाएगा, जिसमें सुमित मिश्रा की ‘हाफ फॉलन ट्री’, विकास चंद्रा की ‘माया’, अनुरिता झा की ‘गुथली’ और आजाद आलम की ‘डोर’ शामिल हैं। इन फिल्मों के बाद आरजे अंजलि के संचालन में फिल्मकारों के साथ सामूहिक संवाद सत्र होगा।
शाम का कार्यक्रम फीचर फिल्मों के नाम रहेगा। पार्थ सौरभ की चर्चित फिल्म ‘पोखर के दुनु पार’ की स्क्रीनिंग होगी, जिसके बाद निर्देशक पार्थ सौरभ और अभिनेता अभिनव झा दर्शकों से बातचीत करेंगे। फेस्टिवल का समापन अचल मिश्रा की सराही गई फिल्म ‘धुइन’ के साथ होगा।
सिनेमा के बिजनेस और कहानी पर दो खास पैनल
फिल्मों के अलावा इस बार सिनेमा को बनाने की प्रक्रिया पर भी गहरी चर्चा होगी। इसके लिए दो पैनल चर्चाएँ रखी गई हैं।
पहला पैनल है – “ब्रिंगिंग सिनेमा होम”। इसमें फिल्म ‘निशानची’ के निर्माता और फ्लिप फिल्म्स के संस्थापक रंजन सिंह, और ‘मंडेला’ व ‘आमिस’ जैसी फिल्मों की निर्माता तथा द राइटर्स इंक इंस्टीट्यूट की संस्थापक अंशुलिका दुबे अपने अनुभव साझा करेंगी।
दूसरा पैनल है – “फाइंडिंग द स्टोरी विदिन”। इसका संचालन भी अंशुलिका दुबे करेंगी। इस पैनल में ‘ग्राम चिकित्सालय’ और ‘परमानेंट रूममेट्स’ की लेखिका श्रेया श्रीवास्तव, ‘प्यार का पंचनामा’ के लेखक वैभव सुमन और ‘व्हाट अ लूज़र’ के लेखक पंकज दुबे शामिल होंगे।
फेस्टिवल डायरेक्टर प्रियंका सिंह के मुताबिक, यह संस्थापक संस्करण एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। यह फेस्टिवल क्षेत्र-क्षेत्र जाकर स्थानीय कहानियों और उन्हें रचने वाले कलाकारों को लगातार एक मंच देगा। पटना म्यूजियम में इसकी यह पहली पहल फिल्मों, सवालों और सीधे संवाद से बिहार के सिने प्रेमियों के लिए एक नया अनुभव लेकर आएगी।
