Friday, September 4, 2026
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डा विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ ने निरस आलोचना-साहित्य को बनाया सरस: डा अनिल सुलभ

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मनाई गई पूर्व अध्यक्ष डा ‘बेचन’ की जयंती

वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ‘डा बेचन स्मृति-सम्मान’ से सम्मानित

पटना। भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डा विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ आलोचना-साहित्य के प्रतिमान-पुरुष थे। उन्होंने आलोचना की विधा को निरसता से निकालकर सरसता प्रदान की। वे एक बड़े कवि, कथाकार और नाटककार थे, यही कारण है कि उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियों में भी काव्य और कथा का लालित्य झलकता है।

यह उद्गार बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने सम्मेलन भवन में आयोजित ‘हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के चौथे दिन डा बेचन जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि डा बेचन बहुआयामी प्रतिभा और साधु-स्वभाव के आकर्षक व्यक्तित्व थे।

वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन सम्मानित

समारोह के दौरान मुंगेर के वरिष्ठ हिन्दी-सेवी पत्रकार कुमार कृष्णन को इस वर्ष के ‘डा विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ स्मृति-सम्मान’ से विभूषित किया गया। उन्हें वंदन-वस्त्र, प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिन्ह और 11 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।

विद्वानों और अतिथियों ने बेचन जी को किया याद

न्यायमूर्त्ति मान्धाता सिंह (पूर्व न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय): कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि डा बेचन ने अपने रचनात्मक व आलोचनात्मक साहित्य से हिन्दी के भंडार को समृद्ध किया और बिहार का गौरव बढ़ाया।

प्रो रत्नेश्वर मिश्र (मुख्य अतिथि): उन्होंने डा बेचन को सर्वप्रिय और प्रभावशाली व्यक्तित्व का धनी बताया। उन्होंने कहा कि बेचन जी अपनी रचनाओं में शोषितों और वंचितों की आवाज उठाते थे। वे किसी एक विचारधारा से बंधे बिना स्वतंत्र लेखन करते थे।

समारोह में मगध विश्वविद्यालय के प्रो शैलेंद्र कुमार चौधरी, डा बेचन के पुत्र व बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के परीक्षा-नियंत्रक डा मनोज कुमार झा, डा ब्रज किशोर पाठक, डा मीना ठाकुर, डा रीना पाठक तथा डा बी एन ठाकुर समेत कई विद्वानों ने डा बेचन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।

कवि-सम्मेलन में गुंजी काव्य-धारा

जयंती के अवसर पर एक भव्य कवि-सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से हुई। इसके बाद वरिष्ठ कवि डा रत्नेश्वर सिंह, शमा कौसर ‘शमा’, इरफ़ान अहमद बेलहारबी, ईं अशोक कुमार, रजनीश कुमार गौरव, इन्दु भूषण सहाय और राजेश शुक्ल जैसे कवियों ने अपनी सुमधुर काव्य-प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

मंच का सफल संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया और धन्यवाद-ज्ञापन सम्मेलन की प्रचार मंत्री विभारानी श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर ईं बाँके बिहारी साव, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, प्रो प्रत्युष, सुधीर कुमार मिश्र, मृणाल कुमार पाठक समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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