पटना, 23 अगस्त 2026: गर्दनीबाग में अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर डटे बिहार के Ph.D. धारकों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षकों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार को आयोजित लोकभवन मार्च के बाद सरकार द्वारा मिले आश्वासन के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद जब कोई प्रतिनिधि वार्ता के लिए नहीं पहुंचा, तो आंदोलनकारियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
लोकभवन मार्च के दौरान सुरक्षा बलों ने आंदोलनकारियों को R-Block के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था। इसके बाद उच्च शिक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सरकार के प्रतिनिधि स्वयं धरनास्थल पर आकर मांगों को स्वीकार करने की अधिकारिक घोषणा करेंगे।
हालांकि, 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई सरकारी प्रतिनिधि धरनास्थल आया और न ही मांगों के संबंध में कोई लिखित या स्पष्ट संदेश भेजा गया।
“खोखले आश्वासनों से अब खत्म नहीं होगा आंदोलन”
आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल ने सरकार के इस रवैये पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि यह रणनीति आंदोलन को कमजोर करने और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
सरकार मौखिक दिलासे के बजाय स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध निर्णय ले।
यदि अगले 24 घंटे में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन का अगला चरण और अधिक व्यापक एवं निर्णायक होगा।
इस दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
भविष्य और अधिकारों की लड़ाई
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि बिहार के हजारों Ph.D. धारकों, शोधार्थियों, अतिथि शिक्षकों और छात्रों के भविष्य और सम्मान से जुड़ा है। जब तक छह सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
धरनास्थल पर प्रमुख उपस्थिति
गर्दनीबाग में जारी आमरण अनशन सह महाधरना में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य अजय यादव, डॉ. राधेश्याम, डॉ. कुंदन सिंह, नितेश पटेल, विश्वजीत चंदेल, आशीष यादव, मोनू यादव, डॉ. विभा प्रकाश, डॉ. राजकुमार पासवान तथा डॉ. उमेश कुमार मुख्य रूप से शामिल रहे।
