Friday, August 21, 2026
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पटना में Ph.D. शोधार्थियों का अनशन 18वें दिन भी जारी: कल 22 अगस्त को ‘लोकभवन घेराव’ का ऐलान

पटना। बिहार की उच्च शिक्षा, युवाओं के रोजगार और शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर राजधानी पटना के गर्दनीबाग में जारी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुक्रवार (21 अगस्त 2026) को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। 'All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar' के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल लगातार आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। 18 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से आंदोलनकारियों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त 2026 को पटना में विशाल 'लोकभवन मार्च एवं घेराव' का आह्वान किया है। यह प्रदर्शन वीर कुंवर सिंह पार्क (आर-ब्लॉक) से शुरू होकर लोकभवन तक जाएगा।

पटना। बिहार की उच्च शिक्षा, युवाओं के रोजगार और शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर राजधानी पटना के गर्दनीबाग में जारी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुक्रवार (21 अगस्त 2026) को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। ‘All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar’ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल लगातार आमरण अनशन पर डटे हुए हैं।

18 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से आंदोलनकारियों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त 2026 को पटना में विशाल ‘लोकभवन मार्च एवं घेराव’ का आह्वान किया है। यह प्रदर्शन वीर कुंवर सिंह पार्क (आर-ब्लॉक) से शुरू होकर लोकभवन तक जाएगा।

लड़ाई किसी दल की नहीं, पूरे बिहार के भविष्य की: कुमुद पटेल

अनशन के 18वें दिन संयोजक कुमुद पटेल ने राज्य के सभी छात्रों, युवाओं, शिक्षकों, छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों से 22 अगस्त के लोकभवन मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई केवल कुछ हजार पदों पर नियुक्ति का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह तय करने की लड़ाई है कि बिहार की उच्च शिक्षा किस दिशा में आगे बढ़ेगी। आज अगर हम अपनी उच्च शिक्षा और युवाओं के हक के लिए नहीं खड़े हुए, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी। 22 अगस्त को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने के लिए हर घर से युवा बाहर आएं।”

आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शनिवार का कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण, अनुशासित और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर आयोजित किया जाएगा।

आंदोलनकारियों की प्रमुख 6 मांगें:

UGC Regulation, 2018 लागू हो: Assistant Professor की नियुक्ति प्रक्रिया में UGC Regulation 2018 और Table 3A को पूरी तरह लागू किया जाए।

आयु सीमा में बढ़ोतरी: Assistant Professor नियुक्ति के लिए अधिकतम उम्र सीमा 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए।

Guest Faculty का समायोजन: वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए न्यायसंगत सेवा समायोजन और नियमितीकरण नीति बनाई जाए।

डोमिसाइल पॉलिसी: बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती में मजबूत और कानूनी रूप से टिकाऊ Domicile Policy लागू की जाए।

समयबद्ध स्थायी नियुक्ति: राज्य के विश्वविद्यालयों में रिक्त पड़े असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियमित एवं समयबद्ध भर्ती हो।

अकादमिक स्वायत्तता: बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता की रक्षा की जाए।

“यह सिर्फ नौकरी नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की लड़ाई है”

आंदोलन से जुड़े शोधार्थियों का कहना है कि Ph.D., JRF, NET और शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन जैसी उपलब्धियों की अनदेखी से युवाओं में उच्च शिक्षा के प्रति हताशा फैल रही है। यदि योग्य शोधार्थियों और अनुभवी अतिथि शिक्षकों को सम्मानजनक अवसर नहीं मिले, तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था और कमजोर होगी।

22 अगस्त के प्रस्तावित मार्च को लेकर पटना में गहमागहमी तेज हो गई है और आंदोलनकारी इसे जन-आंदोलन का रूप देने में जुटे हैं।

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