Saturday, June 15, 2024
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बिहार के जमुई जिले का एक गांव ग्रामीणों के सामुहिक सहयोग से बनेगा नेचर विलेज

बिहार के जमुई जिले का एक गांव ग्रामीणों के सामुहिक सहयोग से बनेगा नेचर विलेज

न्यूज लहर सूत्र जमुई: बिहार के लोग कर्मठ है यह बात तो पूरा विश्व जानता है लेकिन बिहार के नेताओं को इसकी कभी चिंता नहीं रही। बिहार के लोगों की कर्मठता का एक जीता जागता उदाहरण दिया है बिहार के जमुई जिले में एक गांव के कुछ लोगों ने!!

यह कोई सीरियल या फिल्म की नहीं ,यह कहानी है जमुई जिला के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत मटिया बाजार की, जहां ग्रामीणों ने इसकी शुरुआत की है.

मटिया गांव के कुछ लोगों ने अपने गांव की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया और इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है।दफ्तरों के चक्कर लगाने और प्रशासनिक मदद नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने अपने गांव को नेचर विलेज के रूप में विकसित करने का प्रण लिया और खुद ग्रामीणों के बल पर इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। कुछ उत्साही लोगों की पहल के बाद अब ग्रामीणों का सहयोग भी मिल रहा है तथा धीरे-धीरे गांव की तस्वीर बदलने भी लगी है।

ग्रामीणों ने अपने गांव को नेचर विलेज बनाने का लिया निर्णय

बनाने के लिए एक कमिटी भी बना ली है।इस कमिटी को नाम दिया है नेचर विलेज कमिटी। कमिटी के लोगों ने बताया की कमिटी में 15 ग्रामीणों को शामिल किया गया है जिनको गांव को पूर्ण नेचर विलेज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।यह कमिटी गांव के खेतों में प्राकृतिक एवं जहर मुक्त खेती को बढ़ावा देगी।कमेटी को पूरे गांव की तस्वीर बदलने की जिम्मेदारी दी गई है तथा उनके द्वारा ही श्रमदान, मजदूरों तथा जेसीबी के जरिए धीरे-धीरे कर पूरे प्रयास को अंजाम दिया जा रहा है,ग्रामीणों के सामुहिक प्रयास का नतीजा भी अब दिखने लगा है।

गांव में बहाल होगी कई तरह की सुविधा

नेचर विलेज कमिटी के अध्यक्ष महेश मंडल ने बताया कि इस कमिटी के द्वारा गांव में सर्वप्रथम अतिक्रमण हटाकर सड़कों को साफ-सुथरा किया जा रहा है। इसके बाद पूरे गांव की सफाई की जाएगी. विद्यालय परिसर की सफाई कर उसे बच्चों के लिए बेहतर बनाया जाएगा। गांव में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

बाजार में सड़कों के दोनों तरफ पौधे लगाए जाएंगे। स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी, नहरों की साफ-सफाई कराई जाएगी।

इसके बाद यह पूरा गांव खूबसूरत दिखने लगेगा. उन्होंने बताया कि इसमें किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी ना आए इसलिए ग्रामीणों ने आर्थिक अंशदान करने का निर्णय लिया है। इस कार्य में कोई सरकारी और बाहरी मदद नहीं ली गई है ग्रामीणों के चंदे से ही सारा कार्य किया जा रहा है.

बड़े दुकानदार 100 रुपए प्रति माह और छोटे दुकानदारों से 30 रुपए प्रतिमाह चंदा देते हैं उसी से इस पूरे प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। ग्रामीण निखाइल अंसारी ने बताया कि बाजार में हो रहा यह प्रयास काफी अच्छा लग रहा है तथा हमारा बाजार भी सुंदर दिखेगा। इस बात को लेकर यहां के लोगों में काफी खुशी है.

 

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