Monday, March 9, 2026
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बिहार में भूमि सुधार के 100 दिन: राजस्व व्यवस्था से ‘तारीख पर तारीख’ का दौर खत्म, पारदर्शिता की नई शुरुआत

पटना | 09 मार्च 2026

​बिहार में भूमि विवादों को सुलझाने और राजस्व प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में पिछले 100 दिनों में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। विभाग ने “बीमारी को जड़ से मिटाने” के संकल्प के साथ तीन दर्जन से अधिक सुधारात्मक परिपत्र जारी कर आम जनता को बड़ी राहत दी है।

समयबद्ध सेवाएं: अब फाइलों में नहीं अटकेगा काम

​विभाग ने भूमि संबंधी सेवाओं के लिए पहली बार कड़ी समय-सीमा (Deadline) निर्धारित की है, जिससे जनता को अब कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे:

  • दाखिल-खारिज (Mutation): बिना आपत्ति वाले मामलों का निपटारा अब 35 दिन के बजाय मात्र 14 दिनों में होगा।
  • परिमार्जन (त्रुटि सुधार): लिपिकीय सुधार के लिए 15 दिन और तकनीकी सुधार के लिए अधिकतम 35 से 75 दिन तय किए गए हैं।
  • भूमि मापी: अविवादित जमीन की मापी 7 दिन और विवादित की 11 दिन में सुनिश्चित की जाएगी।
  • डिजिटल नकल: ‘चिरकुट’ व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब केवल ऑनलाइन डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियां ही मिलेंगी, जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही के बड़े कदम

  • सीसीटीवी की निगरानी: राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 6.71 करोड़ रुपये की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।
  • भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। मसौढ़ी के एक कर्मचारी को रिकॉर्ड 23 दिनों में बर्खास्त किया गया।
  • लैंड बैंक और वंशावली: औद्योगिक विकास के लिए हर जिले में ‘लैंड बैंक’ बनेगा। शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने का अधिकार अब अंचलाधिकारियों को दिया गया है।
  • कैथी लिपि का समाधान: पुराने दस्तावेजों को समझने के लिए विशेषज्ञों का पैनल बनाया गया है, जो 220 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से कैथी लिपि का अनुवाद करेंगे।

जनता से सीधा संवाद: “भूमि सुधार जनकल्याण संवाद”

​उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग केवल फाइलों तक सीमित नहीं है। 12 दिसंबर से शुरू हुए जनकल्याण संवाद के माध्यम से लखीसराय से लेकर मुजफ्फरपुर और गया तक के लोगों की समस्याएं सीधे सुनी जा रही हैं। साथ ही, अब हर शनिवार को अंचल कार्यालयों में ‘जनता दरबार’ का आयोजन अनिवार्य कर दिया गया है।

विशेष अभियान: ‘ऑपरेशन भूमि दखल देहानी’

​कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति के पर्चाधारियों को उनकी जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने हेतु “ऑपरेशन भूमि दखल देहानी” शुरू किया गया है। साथ ही, वंशावली और पारिवारिक बंटवारे के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जिससे आपसी सहमति से होने वाले बंटवारे और दाखिल-खारिज एक साथ हो सकेंगे।

​”हमारा लक्ष्य एक ऐसा राजस्व प्रशासन बनाना है जहाँ आम आदमी को किसी बिचौलिए की जरूरत न पड़े। पुलिस को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे भूमि विवाद के राजस्व मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें और केवल कानून-व्यवस्था पर ध्यान दें।”

विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री, बिहार

​इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव श्री सी.के. अनिल और कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल भी उपस्थित थे।

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