Thursday, March 19, 2026
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पटना नीट छात्रा मामला: सीबीआई की भारी बेइज्जती: पीड़िता के घर में प्रवेशबंदी

अपने मन गढ़ंत स्टोरी को सच साबित करने के फिराक में पिछले डेढ़ महीने से लगी स्थानीय पुलिस, SIT, और अब देश की सबसे विश्वसनीय मानी जाने वाली जांच एजेंसी सीबीआई को आज भारी बेज्जती का सामना करना पड़ा है।

गत 10 फरवरी से इस हाई प्रोफाइल रेप एंड मर्डर मामले की जांच में लगी सीबीआई का शुरुआत से लेकर अभी तक जांच का दायरा मृतक पीड़िता के परिजन ही रहा है।

और बिना रोक-टोक के जब भी सीबीआई अधिकारियों के मन में आता है। वह जाकर कभी पीड़िता के पिता से, तो कभी पीड़िता के मां या फिर भाई से घंटों पूछताछ करती है। तो कभी मामा या मामी से पूछताछ करती हैं और फिर इसका बेशर्मी भरा मीडिया ट्रायल भी चलता है।

अभी दो-तीन दिन पहले ही पोक्सो कोर्ट में इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका रद्द हुई है। जिसमें SIT के साथ सीबीआई के तरफ से भी पूरा प्रयास हुआ कि आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिल जाए। लेकिन पीडित पक्ष के वकील के निरंतर विरोध के कारण आरोपी मनीष रंजन का जमानत रद्द हो गया।

आज बुधवार को भी सीबीआई की एक अजीब करतूत सामने आइ। जिस कारण देश भर में सीबीआई को भारी किरकिरी झेलनी पड़ी हैं। आज अचानक बिना कोई पूर्व सूचना के सीबीआई अपने दलबल के साथ और स्थानीय पुलिस को साथ में लेकर पीड़िता के घर पर पहुंच गई।

जहां पीड़िता के घर वालों के साथ स्थानीय गांव वालों ने भी सीबीआई का जमकर विरोध किया और CBI को बैरंग वापस जाने का आदेश सुनाया। गांववालो का विरोध और घर वालों के असहयोग को देखते हुए सीबीआई के अधिकारियों ने लौटने में ही अपनी भलाई समझी।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सीबीआई की डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे जहानाबाद जिले में स्थित पीड़िता के घर पहुंची। उनके साथ स्थानीय शकूराबाद थाने की पुलिस भी मौजूद थी।

​गांव पहुंचकर सीबीआई टीम ने पीड़िता के परिजनों को अपना परिचय दिया और परिजनों से बात करने की कोशिश की। लेकिन, मृतक छात्रा के परिजनों ने सीबीआई को किसी भी तरह की जानकारी या सहयोग देने से साफ इनकार कर दिया।

और सीबीआई टीम को घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया। यानी दरवाज़े से ही वापस जाने का निर्देश दिया। मजबूरन करीब 20 मिनट के दरवाजे पर इंतजार के बाद भी जब परिजन नहीं माने, तो सीबीआई टीम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना है कि जब से यह घटना घटी है कभी पुलिस, तो कभी एसआईटी टीम और अब यह सीबीआई की टीम जब मन में आता है पीड़िता के गांव आ जाते हैं। और मनमाने ढंग से पीड़िता के मां, पिता, भाई या फिर अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ करते हैं।

उनके आने, पूछताछ का ढंग और “निष्कर्ष ढाक के तीन पात” से सिर्फ परिजन ही नहीं गांव के लोग भी ऊब चुके हैं। क्योंकि पूछताछ करके तो यह जांच टीम चली जाती है। लेकिन इसके बाद पूरा घर डिस्टर्ब हो जाता हैं।

मां का रोते रोते बुरा हाल रहता है जिससे पूरे घर को अनेक दिनों तक मां की देखभाल करनी पड़ती है। 3 दिन पहले ही पीड़िता की मां ने कोर्ट में सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह कहा था कि सीबीआई इस मामले की लीपा पोती कर रही है और हमें ही फसाने का षड्यंत्र रच रही है।

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