पटना | 12 मार्च, 2026
बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में अंचल कार्यालयों (Block/Anchal Offices) की बदहाली और वहां जड़ जमा चुके ‘बिचौलिया तंत्र’ के खिलाफ नीतीश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्वीकार किया है कि केवल डिजिटल निगरानी (CCTV/Biometric) के भरोसे भ्रष्टाचार को नहीं रोका जा सकता। अब ‘फिजिकल स्ट्राइक’ के जरिए अंचलों की कार्यप्रणाली को सुधारा जाएगा।
कुव्यवस्था का कड़वा सच: फाइलों में कैद इंसाफ
विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज द्वारा जिलाधिकारियों को लिखे पत्र ने विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। विभाग का मानना है कि:
- निरीक्षण का अभाव: नियम के अनुसार होने वाले अर्द्धवार्षिक और त्रैमासिक निरीक्षण कागजों तक सीमित रह गए हैं।
- दलाल-मुंशी प्रथा: अंचल कार्यालयों में आम जनता के बजाय दलाल और मुंशी हावी हैं, जो म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) जैसे कार्यों के लिए सिंडिकेट चला रहे हैं।
- लंबित मामले: जानबूझकर फाइलों को लटकाना और तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर अवैध वसूली करना अब आम बात हो गई है।
‘स्पेशल-3’ टीम: तीन स्तर पर होगी जांच
भ्रष्टाचार के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए गठित तीन सदस्यीय टीम को व्यापक शक्तियां दी गई हैं। इस टीम का नेतृत्व अपर समाहर्त्ता (ADM) करेंगे, जो सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट करेंगे।

जांच के मुख्य बिंदु:
- लंबित म्यूटेशन: आखिर किन कारणों से दाखिल-खारिज के आवेदन रद्द किए जा रहे हैं या लंबित रखे जा रहे हैं।
- बिचौलियों की उपस्थिति: कार्यालय परिसर में अनाधिकृत व्यक्तियों (दलाल/प्राइवेट मुंशी) की मौजूदगी पर ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई।
- डिजिटल डेटा से छेड़छाड़: बैक-डेट में प्रविष्टि या डेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की तकनीकी जांच।
क्या बदलेगी अंचलों की तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘प्रशासनिक सर्जरी’ जैसा है। अब तक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की कोई सुध नहीं लेता था, लेकिन अब एडीएम स्तर के अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होने से निचले स्तर के कर्मचारियों में हड़कंप मचना तय है। विभाग का मुख्य लक्ष्य ‘लोक सेवा का अधिकार अधिनियम’ (RTPS) के तहत दी जाने वाली सेवाओं को समय सीमा के भीतर पारदर्शी बनाना है।
