Tuesday, March 10, 2026
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लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए ‘डिजिटल जागरूकता’ अनिवार्य: सभापति अवधेश नारायण सिंह

पटना | 10 मार्च 2026

​डिजिटल युग की चुनौतियों और साइबर अपराधों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए आज बिहार विधान परिषद में “साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जागरूकता कार्यशाला” का भव्य आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य माननीय सदस्यों को डीपफेक, फिशिंग और एआई जैसी उभरती तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के प्रति प्रशिक्षित करना है।

तकनीकी विशेषज्ञों का जमावड़ा और ‘साइबर मैनुअल’ का विमोचन

​कार्यक्रम का उद्घाटन विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामबचन राय, और ‘द एशिया फाउंडेशन’ की इंडिया हेड नंदिता बरुआह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ‘साइबर सुरक्षा मैनुअल’ का लोकार्पण भी किया गया, जो जनप्रतिनिधियों के लिए डिजिटल सुरक्षा कवच का काम करेगी।

लाइव डेमो: डीपफेक और एआई के खतरों का प्रदर्शन

​कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता DeepCytes के विशेषज्ञों द्वारा दिया गया लाइव डेमोंस्ट्रेशन रहा। इसमें दिखाया गया कि कैसे एआई की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज या पहचान (Deepfake) का दुरुपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया:

  • रियल-टाइम साइबर रिस्क: डिजिटल सिस्टम में छिपे खतरों की पहचान करना।
  • फिशिंग से बचाव: संदिग्ध ईमेल, लिंक और मैसेज को पहचानने के तरीके।
  • ऑनलाइन फ्रॉड: वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के सुरक्षा उपाय।

नंदिता बरुआह और विशेषज्ञों का संबोधन

​’द एशिया फाउंडेशन’ की इंडिया हेड नंदिता बरुआह ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग साइबर हमलों के प्राथमिक लक्ष्य होते हैं। अतः उनकी डिजिटल सुरक्षा सीधे तौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा से जुड़ी है। वहीं DeepCytes के सह-संस्थापक शुभम पारेख और डॉ. मनीष प्रसाद ने साइबर ड्रिल के माध्यम से सदस्यों को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया।

कल भी जारी रहेगा प्रशिक्षण

​जन जागरण संस्थान के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में विधान पार्षद संजीव कुमार सहित कई माननीय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एशिया फाउंडेशन की प्रतिनिधि ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आदित्य गौतम ने दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कल यानी 11 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा।

​कार्यशाला के अंत में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान दौर में लोकतंत्र की मजबूती के लिए मजबूत पासवर्ड और डिजिटल सजगता उतनी ही जरूरी है, जितनी कि सुरक्षित मतपेटियां।

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