Wednesday, February 25, 2026
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बिहार में राजस्व वादों के लिए ‘डेडलाइन’ तय: समय पर न्याय नहीं मिला तो नपेंगे अधिकारी, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की सख्त चेतावनी

पटना | 25 फरवरी 2026 बिहार सरकार ने राज्य के राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े भूमि विवादों और दाखिल-खारिज जैसे मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को समयबद्ध न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पटना | 25 फरवरी 2026 बिहार सरकार ने राज्य के राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े भूमि विवादों और दाखिल-खारिज जैसे मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को समयबद्ध न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

“न्याय होना ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए”

उपमुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि आरसीएमएस (RCMS) और बिहारभूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों का निपटारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में सुनिश्चित हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारी ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों का पालन करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

प्रधान सचिव का समाहर्ताओं को पत्र: तय हुई नई समय-सीमा

विभाग के प्रधान सचिव श्री सी.के. अनिल ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को पत्र लिखकर नए सिरे से समय-सीमा का पालन करने का आदेश दिया है। विभाग ने दो प्रमुख न्यायिक सिद्धांतों को आधार बनाने का निर्देश दिया है:

  1. Audi Alteram Partem: किसी भी पक्ष को बिना सुने आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
  2. Nemo Debet Esse Judex in Propria Sua Causa: कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता (पक्षपात मुक्त न्याय)।

अब कितने दिनों में होगा आपके मामले का निपटारा?

विभाग ने अलग-अलग न्यायालयों के लिए कार्य निष्पादन की समय-सीमा (Deadline) सार्वजनिक कर दी है:

1. अंचल अधिकारी (CO) न्यायालय:

  • भूमि दाखिल-खारिज (बिना आपत्ति): 35 दिन
  • भूमि दाखिल-खारिज (आपत्ति सहित): 75 दिन
  • लोक भूमि अतिक्रमण वाद: 90 दिन
  • भू-मापी वाद: 7 से 11 दिन

2. भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) न्यायालय:

  • दाखिल-खारिज अपील: 30 दिन
  • भूमि विवाद निराकरण/लगान निर्धारण: 90 दिन
  • बटाईदारी वाद/दान-पत्र सम्पुष्टि: 90 दिन

3. अपर समाहर्ता (ADM) न्यायालय:

  • जमाबंदी रद्दीकरण: 30 दिन
  • दाखिल-खारिज रिवीजन अपील: 30 दिन
  • भू-हदबंदी एवं भू-दान यज्ञ अधिनियम वाद: 90 दिन

नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही

प्रधान सचिव ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों की सतत समीक्षा (Continuous Review) करें। विभागीय जांच में पाया गया है कि कई स्तरों पर निर्धारित समय के बावजूद मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। अब हर मामले की प्रगति की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी।

डिप्टी सीएम का संदेश: “जनता के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा। अनावश्यक विलंब या उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

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