पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने वाले सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद जारी आदेश में उनकी सेवा पूरी तरह समाप्त कर दी गई।

उपमुख्यमंत्री का सख्त रुख: उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी नौकरी में जालसाजी, कूटरचना या फर्जी प्रमाण-पत्र के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर कायम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम प्रशासनिक शुचिता को मजबूत करने और जनता का विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
जालसाजी का खुलासा कैसे हुआ: प्रिंस राज ने बिहार लोक सेवा आयोग की 60-62वीं संयुक्त परीक्षा (2006) में चयन के लिए दो अलग-अलग नामों—प्रिंस राज और धर्मेंद्र कुमार— तथा दो जन्मतिथियों से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के फर्जी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए थे।
विशेष निगरानी इकाई की जांच (कांड संख्या 04/2025) में यह धोखा सामने आया। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 1 अगस्त 2025 को 2006 का प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया, जिसके बाद विभाग ने आयोग से राय लेकर कार्रवाई की।
करियर और कार्रवाई का विवरण: 2019 में राजस्व अधिकारी के रूप में चयनित प्रिंस राज (पिता: रघुनंदन साह, ग्राम झिक्की, हिसार, मधुबनी) ने चनपटिया (पश्चिम चंपारण) से प्रशिक्षण शुरू किया और 2023 तक सेवा संपुष्टि प्राप्त कर ली।
लेकिन विभागीय नियमों के तहत फर्जी प्रमाण-पत्र पाए जाने पर बिना पूर्व सूचना सेवा समाप्ति का प्रावधान लागू हुआ। शुक्रवार (21 फरवरी 2026) को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलते ही आदेश जारी कर दिया गया।
यह घटना बिहार सरकार की सख्ती का उदाहरण है, जो अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी बनेगी।
