हाजीपुर/पटना: पूर्व मध्य रेलवे ने बिहार में रेल कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक विशाल परियोजना का रोडमैप तैयार किया है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन से झाझा के बीच लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 17,000 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना के पूरा होने से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि परिचालन में होने वाली देरी (पंक्चुअलिटी) की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
परियोजना का मुख्य ढांचा: 6 खंडों में बंटा काम
रेलवे बोर्ड ने इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को सुगमता से पूरा करने के लिए इसे छह महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित किया है:
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं.-दानापुर
दानापुर-फतुहा
फतुहा-बख्तियारपुर
बख्तियारपुर-पुनारख
पुनारख-किऊल
किऊल-झाझा
वर्तमान प्रगति और स्वीकृति
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से मंजूरी मिल रही है। अब तक की स्थिति इस प्रकार है:
मंजूरी मिली: फतुहा-बख्तियारपुर (24 किमी) और बख्तियारपुर-पुनारख (30 किमी) को पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है।
ताज़ा अपडेट: हाल ही में पुनारख से किऊल (50 किमी) के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को भी बोर्ड द्वारा स्वीकृति दे दी गई है।
निविदा प्रक्रिया: बख्तियारपुर-पुनारख खंड के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही भूमि अधिग्रहण के साथ निर्माण कार्य शुरू होगा।
क्यों पड़ी इस कॉरिडोर की जरूरत?
डीडीयू-झाझा रेल लाइन का इतिहास 1860-70 के दशक का है। दशकों पुराने इस ट्रैक पर आज ट्रैफिक का दबाव अपनी क्षमता से कई गुना अधिक है। बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण यात्री और मालगाड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे ट्रैक के रखरखाव और ट्रेनों को समय पर चलाने में चुनौतियां आ रही थीं।
”इन लाइनों के निर्माण से पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को भी मजबूती मिलेगी। मालगाड़ियों का अलग रास्ता होने से यात्री ट्रेनों के लिए ट्रैक खाली रहेगा, जिससे नई ट्रेनें चलाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।”
भविष्य की तस्वीर: क्या होंगे लाभ?
सुगम परिचालन: रेल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म होगी।
आर्थिक विकास: बेहतर कनेक्टिविटी से बिहार में औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी।
अतिरिक्त ट्रेनें: ट्रैक क्षमता बढ़ने से भविष्य में अधिक संख्या में मेल/एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
