Thursday, February 19, 2026
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नीट छात्रा मौत मामला: पीड़िता का परिवार मीडिया ट्रायल से शर्मसार फिर भी न्याय की आस?

पटना। 6 जनवरी को हुई एक नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब न्याय के सवालों से घिर गया है। तीन अस्पतालों में इलाज के बावजूद पुलिस को जिस अस्पताल संचालक ने सूचना नहीं दी उन पर कार्रवाई न होने से सवाल उठे हैं, वहीं पुलिस, SIT के बाद अब सीबीआई पर भी परिवार को प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडे ने इस मामले गंभीरता पूर्वक कहा है कि मीडिया ट्रायल से पीड़ित परिवार रोज अपमान झेल रहा है ऐसे में उन्हें न्याय कब मिलेगा।

पटना। 6 जनवरी को हुई एक नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब न्याय के सवालों से घिर गया है। तीन अस्पतालों में इलाज के बावजूद पुलिस को जिस अस्पताल संचालक ने सूचना नहीं दी उन पर कार्रवाई न होने से सवाल उठे हैं,

वहीं पुलिस, SIT के बाद अब सीबीआई पर भी परिवार को प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडे ने इस मामले गंभीरता पूर्वक कहा है कि मीडिया ट्रायल से पीड़ित परिवार रोज अपमान झेल रहा है ऐसे में उन्हें न्याय कब मिलेगा।

घटनाक्रम और जांच में खामियां, मौत और अस्पतालों की चुप्पी: 6 से 11 जनवरी तक चली घटना में छात्रा का इलाज तीन अस्पतालों में हुआ, लेकिन जिन अस्पताल प्रबंधन ने पीड़िता के गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती होने पर स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं दी। इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। और सीबीआई टीम की भी इन अस्पतालों में जाने या पूछताछ करने की खबर किसी समाचार पत्र में नहीं आ रहा है।

पुलिस का रुख: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इसे आत्महत्या साबित करने का सार्वजनिक प्रयास किया। पीड़ित परिवार ने डीजीपी और एसआईटी पर प्रताड़ना, धमकी और केस वापस लेने का दबाव डालने का आरोप लगाया। इस मामले में भी सीबीआई का रुख पुलिस अधिकारियों पर क्या है यह भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

सीबीआई की भूमिका: राज्य सरकार ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे असंतोष के बाद यह मामला मामला सीबीआई को सौंपा है, लेकिन CBI की जांच पटना पुलिस और एसआईटी के पदचिन्हों पर चल रही।

पहले दिन से परिवार पर दबाव, घर के सभी सदस्यों के मोबाइल जब्त, सभी से पूछताछ, यहां तक कि मामा से भी पूछताछ, और इन पूछताछ में कहीं भी सीबीआई टीम को कोई सफलता मिली है यह भी कहीं भी मीडिया ट्रायल में नहीं दिख रहा है।

मीडिया ट्रायल का पीड़िता के परिजनों को शर्मसार करने वाला सवाल: आज पटना के एक प्रमुख दैनिक में सुर्खी बनी: “दुष्कर्म हुआ या सहमति से संबंध बने?”। सीबीआई इस एंगल से जांच कर रही है। ऐसे सवाल पीड़िता के परिवार को शर्मसार कर रहे हैं।

अरुण कुमार पांडे कहते हैं, “पुलिस, एसआईटी या सीबीआई को आरोपियों को सबूतों के साथ गिरफ्तार कर नाम उजागर करना चाहिए। निरंतर मीडिया ट्रायल से परिवार जिल्लत झेल रहा है।”

कानूनी प्रावधान और मांग: नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत, सहमति से बने शारीरिक संबंध होने के बावजूद अगर पीड़िता की मौत हो जाती है और उस के बाद पोस्टमार्टम में पीड़िता के शरीर पर गंभीर जख्म मिलते है तो यह अपराध हत्या माने जाते हैं।

ऐसे में सीबीआई को असली बलात्कारियों को पकड़कर नाम उजागर करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। पटना, बिहार के साथ पूरे देश के संवेदनशील लोग इस मामले में पीड़िता के परिवार को न्याय मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सीबीआई का बिहार रिकॉर्ड विवादास्पद: राज्य सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंपा है, लेकिन CBI का बिहार में रिकॉर्ड साफ नहीं है। भूमिहार समाज के नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड 8-10 साल पहले नीतीश सरकार ने सीबीआई को सौंपा था, अभी तक कोई परिणाम नहीं।

बिहार में CBI जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को दागदार करने वाले अनेक संदर्भ है। और इस नीट छात्रा मामले में सीबीआई के पिछले कुछ दिनों के क्रियाकलापों से आम नागरिक अब सीबीआई को भी पटना पुलिस और SIT के जैसे ही संदेहास्पद नजर से देखने लगी है। और अब आने वाला समय ही यह सिद्ध करेगा कि CBI कितनी विश्वशनीय है।

यह मामला नारी सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोपी चाहे जो कोई भी हो, सच कब सामने आयेगा? और पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा?

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