Wednesday, February 18, 2026
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बिहार में अब दाखिल-खारिज में नहीं होगा ‘अनावश्यक’ विलंब, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ शब्दों को किया स्पष्ट

पटना। बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

बिहार विधानसभा में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि अब ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा तय कर दी गई है, ताकि अंचल अधिकारी (CO) तकनीकी पेच फंसाकर आम जनता को परेशान न कर सकें।

भ्रम दूर करने के लिए नई परिभाषा: डिप्टी सीएम ने सदन को बताया कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में प्रयुक्त शब्दावली का अलग-अलग अंचलों में अलग-अलग अर्थ निकाला जा रहा था, जिससे वास्तविक खरीदारों (Bonafide Purchasers) के मामले बेवजह लटके रहते थे। विभाग के प्रधान सचिव श्री सीके अनिल द्वारा इस संबंध में सभी राजस्व अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

क्या है ‘सक्षम न्यायालय’?: अब स्पष्ट कर दिया गया है कि सक्षम न्यायालय की श्रेणी में निम्नलिखित आएंगे:

* न्यायालय: सिविल कोर्ट (व्यवहार न्यायालय), पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय।

* राजस्व न्यायालय: DCLR, ADM, DM, कमिश्नर कोर्ट।

* विशेष निकाय: विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय और बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BLT)।

लंबित’ मामले का नया मानक: उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी मामले को केवल इसलिए ‘लंबित’ नहीं माना जाएगा कि उस पर कोई आवेदन या आपत्ति दी गई है।

लंबित तभी माना जाएगा जब:

* न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान (Admission) लिया गया हो।

* विधिवत नोटिस निर्गत किया गया हो।

* न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से स्थगनादेश (Stay Order), अंतरिम आदेश या यथास्थिति (Status Quo) का आदेश प्रभावी हो।

अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश: विजय कुमार सिन्हा ने जोर देकर कहा कि यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा स्पष्ट स्थगनादेश नहीं है, तो राजस्व अधिकारी दाखिल-खारिज की कार्यवाही रोकने के बजाय उसे नियमानुसार जारी रखेंगे।

उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि न्यायालय की प्रति में ‘Admission’ (स्वीकरण) स्पष्ट रूप से अंकित नहीं है, तो उसे लंबित मानकर फाइल नहीं दबाई जा सकती।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर: डिप्टी सीएम ने कहा कि “डबल इंजन की सरकार” की प्राथमिकता वास्तविक क्रेताओं को राहत देना और भूमि विवादों का समयबद्ध निपटारा करना है। इस नई व्याख्या से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और अंचल कार्यालयों में बिचौलियों का हस्तक्षेप कम होगा।

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